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गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर का 65 साल की उम्र में निधन हो गया। जो कि गोवा के सीएम और पूर्व रक्षा मंत्री रह चुके रह चुके है। रविवार को उन्होंने अपनी अंतिम सांसे छोड़ दी। वे पिछले 1 साल से पैंक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित थे। आज शाम 5:00 बजे से कैम्पल स्थित एसएजी मैदान में उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मनोहर पर्रिकर अपनी सादगी वाले जीवन के लिए मशहूर थे। उन्हें अपने मीटिंग के लिए कई बार फाइव स्टार होटल में चक्कर लगाने पड़ते थे। वे हमेशा शादी ड्रेस में रहते थे और उनका हाव-भाव देख कर फाइव स्टार होटल होटल में एक दरबान ने उन्हें होटल में जाने से रोक दिया था।दरअसल पर्रिकर ने अपने करीबियों को बताया कि एक बार उन्हें एक फाइव स्टार होटल में मीटिंग के लिए जाना था, लेकिन आखिरी वक्त पर उनकी गाड़ी खराब हो गई।

उन्होंने तुरंत एक टैक्सी को बुक किया और साधारण कपड़ों में ही वे फाइव स्टार होटल पर जा पहुंचे। जैसे होटल के एंट्री गेट पर पहुंचे तो उन्हें एक दरबान ने होटल में जाने से रोक दिया और बोला कि ‘तुम अंदर नहीं जा सकते नहीं जा सकते’। दरबान ने जब जब पर्रिकर को नहीं पहचाना तो उन्होंने अपना नाम बताते हुए कहा कि वह गोवा के मुख्यमंत्री हैं। यह सुनकर दरबान जोर-जोर से हंसने लगा और कहा, ‘अगर तू मुख्यमंत्री है है तो मैं प्रेसिडेंट हूं।’

इतने में प्रोग्राम के आयोजक वहां पर जा पहुंचे और दरबार को जाकर समझाया कि उन्हें होटल के अंदर एंट्री दी जाए। इतना ही नहीं कभी-कभी तो वे स्कूटर पर ही फाइव-स्टार होटल में जाया करते थे। इस प्रकार उनकी सादगी को देखा जा सकता है। सन 2012 में एक 5 स्टार होटल में हो रही मीटिंग रही स्टार होटल में हो रही मीटिंग रही मीटिंग के दौरान उन्होंने यह किस्सा सुनाया था कि उन्हें जब फाइव स्टार होटल में आने पर दरबान द्वारा गेट पर रोका गया, तब उनके साथ कोई भी पुलिस सिक्योरिटी ऑफिसर मौजूद नहीं था। उन्होंने दरबान को कहा कि वह गोवा के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। पर्रिकर ने यह भी बताया कि उन्हें तकरीबन पांच-छह बार ऐसे रोका जा चुका था और हर बार वह अपने सीएम होने की बात बताते थे और उनके हावभाव देखकर दरबार गेट पर ही उन्हें रोक देता था।

उन्होंने इस बारे में कहा कि दरबान का व्यवहार देख कर कर उनका ईगो जरूर हर्ट होता था, लेकिन उन्हें यह बात बाद में समझ आ गयी कि दरबान का यह जानना जरूरी नहीं कि मैं सीएम हूँ या कुछ कोई और व्यक्ति। एक बार पर्रिकर ने अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए एक किस्सा सुनाया कि हॉस्टल में उनका एक दोस्त था। जो शराब और सिगरेट पिया करता था। वह ब्राह्मण परिवार से था। एक बार वह उस लड़के के साथ कमरे में बैठे हुए थे और उनके दोस्त के हाथ में सिगरेट और एक पेग बना हुआ था। इतने में उस लड़के के पिताजी वहां पर आ गए और उन्होंने अपने दोस्त को बचाने के लिए दोस्त के हाथ से सिगरेट और शराब ले ली और कमरे से बाहर निकल आए। जबकि पर्रिकर ने इन चीजों को कभी भी हाथ भी नहीं लगाया था। दोस्त के पिता ने कहा कि बेटा ऐसे बच्चों की संगत में कभी भी मत रहना।

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