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हिन्दुस्तान अभी बहुत ही शोक भरे दौर से गुजर रहा है जहाँ सबकी आँखों में आंसू है और हर कोई ग़मगीन हो उठा है. हर किसी की आँखों में दर्द है लेकिन ये अन्दर ही अन्दर जानते है सभी जानते है कि पुलवामा में जो कुछ भी हुआ उसके पीछे कौन लोग है और इनके आतंक को कौन लोग समर्थन देते है. सरकार इन लोगो के खिलाफ सख्त मूड में है और कई फैसले लगातार लिये जा रहे है. कश्मीर में सेना को खुली छूट मिल गयी है जिसके बाद दनादन तरीके से सर्च ऑपरेशन जारी ही और सरकार ने एक और बड़ा फैसला किया है कि कश्मीर के सभी हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा खत्म की जायेगी.

आपको बता दे हुर्रियत वो लोग है जो कश्मीर को भारत से अलग करने के लिये बने है और इनका मकसद सिर्फ और सिर्फ भारत के खिलाफ जहर उगलना है लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के चलते सरकारे इन्हें भी सुरक्षा देने पर बाध्य थी,

लेकिन पुलवामा हमले के बाद सरकार ने बिलकुल ही सख्त रूख अख्तियार कर लिया है और हुर्रियत नेताओं से उनकी सुरक्षाए छीन ली गयी है. अब अगर इनके साथ में कुछ भी होता है तो ऐसी स्थिति में सरकार की तो कोई भी जिम्मेदारी कत्तई नही होगी. इससे पहले भी सरकार ने हुर्रियत से बात करनी बंद कर दी थी और इन्हें अलग थलग कर दिया गया था लेकिन अब इन्हें किसी तरह की सरकारी सुरक्षा न देने पर ये बिलकुल ही बिखर जायेंगे.

हो सकता है इसके बाद में कुछ शान्तिप्रिय लोग सरकार पर दोष मढने लगे कि ऐसा क्यों हुआ? पर अब यही एक रास्ता है जिस पर चलकर के कश्मीर में मौजूद ऐसे लोगो पर काबू पाया जाता है जो देशद्रोही विचाराधाराओं को पलने में मदद करते है. हुर्रियत का नाम कई बड़े बड़े आतंकियो के साथ मिले होने में आता रहता है.

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