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राष्ट्रपति यानि देश का सर्वोच्च व्यक्ति, देश का प्रथम नागरिक और उसकी सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण होती है इस बात में कोई भी शक नही है इसलिए देश की सबसे ज्यादा सुरक्षा करने का काम राष्ट्रपति के प्रति समर्पित होता है और इसमें आर्मी से लेकर सुरक्षा एजेंसियां और एसपीजी तक शामिल होती है लेकिन आपको एक रोचक बात तो पता ही नही होगी. हर कोई राष्ट्रपति के सुरक्षा दस्ते में शामिल नही हो सकता है. चाहे आप कितने ही बड़े बॉडी बिल्डर हो, चाहे आप कितने ही बड़े स्नाइपर हो, चाहे आपको खतरनाक मार्शल आर्ट्स आते हो लेकिन राष्ट्रपति की सुरक्षा करने के योग्य सिर्फ तीन जाति के लोग माने जाते है इसमें पहली जाति है राजपूत, दूसरी जाति है सिख और तीसरी जाति है जाट.

तीनो ही क्षत्रिय समुदाय से आने वाले लोग है और पुराने समय में ये लोग योद्धा कहे जाते थे लेकिन अब लोकतांत्रिक व्यवस्था में और जातियों की तरफ से इस व्यवस्था को चुनौती मिलने लगी है और अभी हाल ही में गौरव यादव नाम के एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

अगर वो योग्य है तो वो क्यों इस सुरक्षा दस्ते में शामिल नही हो सकता है? बस इसलिए क्योंकि वो उस जाति से नही आता है और ऐसी स्थिति में अभी तो मामला चल रहा है और देखने वाली बात यही होगी कि आखिर में इस पर क्या कुछ फैसला आ पाता है. खैर जो भी है पीएम को लेकर के सारे प्रोटोकोल एसपीजी तय करती है जबकि राष्ट्रपति के लिए कुछ एसपीजी तय करती है.

जबकि कुछ पहले से लिखित है और क्योंकि राष्ट्रपति देश के सबसे बड़े नागरिक कहे जाते है तो इस वजह से इस मामले में किसी तरह की कोई टिपन्नी कोर्ट या कोई भी नेता या ऑफिसियल देने से बचता ही बचता है. हालांकि अब इसका हल क्या होगा ये देखने वाली बात होगी.

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